ट्यूबलर स्राव शरीर के तरल पदार्थों में आयनिक और अम्ल-क्षार संतुलन बनाए रखने में कैसे मदद करता है?

  • A
    रक्त से अतिरिक्त $H^{+}$ और $K^{+}$ आयनों को निस्यंद (filtrate) में हटाकर।
  • B
    निस्यंद से पानी को पुनः अवशोषित करके।
  • C
    बड़े प्रोटीन को मूत्र में छानकर।
  • D
    ग्लोमेरुलर निस्पंदन दर को बढ़ाकर।

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समुद्री अस्थिल मछलियों और रेगिस्तानी उभयचरों में उत्सर्जन का एकमात्र तरीका . . . . . . है।

ग्लोमेरुलर निस्यंद (glomerular filtrate) का चयनात्मक पुनरावशोषण कहाँ होता है?

$I.$ नेफ्रॉन के प्रारंभिक खंड में जल का पुनरावशोषण निष्क्रिय रूप से होता है।
$II.$ नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट सक्रिय परिवहन द्वारा अवशोषित होते हैं।
$III.$ $DCT$ में $Na^{+}$ और जल का सशर्त पुनरावशोषण होता है।
$IV.$ $DCT$ ग्लूकोज का पुनरावशोषण करता है।
$V.$ $DCT$ रक्त में $pH$ और $Na^{+}-K^{+}$ संतुलन बनाए रखने के लिए $H^{+}$,$K^{+}$ और $NH_{3}$ के चयनात्मक स्राव में सक्षम है।
$VI.$ निस्यंद (filtrate) में ग्लूकोज,अमीनो एसिड,$Na^{+}$ आदि जैसे पदार्थ सक्रिय रूप से पुनरावशोषित होते हैं।
गलत कथनों वाले विकल्प का चयन करें।

$PCT$ शरीर के तरल पदार्थों में $pH$ के रखरखाव में कैसे मदद करता है?

वृक्क (किडनी) में नेफ्रॉन द्वारा प्रतिदिन बड़ी मात्रा में तरल पदार्थ छनता है। इसमें से केवल $1\%$ ही मूत्र के रूप में उत्सर्जित होता है। निस्यंद (filtrate) का शेष $99\%$ भाग

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